R S S ka Full form | RSS की पूरी जानकारी हिंदी में

 RSS kya hai , RSS ka full form kya hai? और आरएसएस का क्या मतलब होता हैं क्या आपको पता है अगर नहीं तो आप इन सभी सवालों का जवाब जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अवश्य पढ़ें।

आप इस ब्लॉग में आर एस एस क्या है R S S ka full form क्या होता है। आर एस एस संगठन के बारे में भी पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं। जैसे कि R S S संगठन की स्थापना कब हुई? और कहां हुई तथा आर एस एस का कार्य क्या है? आदि जानकारी आप इस ब्लॉग में पढ सकते हैं। 

r s s ka full form

Table of Content
  1. R S S ka full form आरएसएस फुल फॉर्म इन हिंदी
  2. RSS की स्थापना
  3. RSS का मतलब क्या होता है?
  4. RSS के कितने संगठन है?
  5. RSS का कार्य
  6. RSS का इतिहास
  7. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनों के नाम
  8. RSS से जुड़ने से फायदे
  9. RSS ज्वाइन कैसे करें?
  10. RSS की सैलरी कितनी होती है?
  11. RSS का मुख्य उद्देश्य।
  12. Conclusion-

R S S ka full form आरएसएस फुल फॉर्म इन हिंदी

R S S ka full form- Rashtriya Swayamsevak Sangh होता है। आरएसएस को हिंदी में "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि या वर्तमान में भारत का सबसे प्रमुख एवं सबसे बड़ा संगठन है। इस संगठन में कोई भी हिंदू व्यक्ति सदस्य बन सकता है। इस संघ का आशीष संगठन एवं समुदाय से हैं। आरक्षित भारत का अर्ध सैनिक, हिंदू राष्ट्रवादी एवं स्वयंसेवक संगठन संघ है।

आपको बता दें कि RSS को बीजेपी का पैतृक संगठन माना जाता है। अधिकतर लोग इसके हिंदी नाम से न जानकर इस को आर एस एस के नाम से जानते हैं।

RSS की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को केशव बलिराम हेडगेवार के द्वारा किया गया था। एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय नागपुर (महाराष्ट्र) में स्थित है। भारत में वर्तमान समय में RSS को एक सबसे बड़ा आंदोलन के रूप में माना जाता है। 

RSS की अधिक प्रकार की शाखाएं भारत के हर क्षेत्र में स्थित है।

RSS का मतलब क्या होता है?

आपका सवाल यह है, कि RSS का मतलब क्या होता है? आपको बता दें कि आर एस एस का मतलब होता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक हिंदू राष्ट्रवादी अर्धसैनिक स्वयंसेवक संघ है। जो व्यापक रूप से भारत के सत्ता दल भारतीय जनता पार्टी का एक पैतृक संगठन माना जाता है। आपको यह भी बता दे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अपेक्षा संध्या RSS के नाम से भी अधिक प्रसिद्ध है। बीबीसी के अनुसार यह संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संग है। यह संघ भारत को हिंदू राष्ट्रवादी बनाने के लिए लक्ष्य के साथ 27 सितंबर 1925 को डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी ने विजयादशमी के दिन RSS की स्थापना नागपुर में की थी।

RSS के कितने संगठन है?

आपको इस बात से परिचित  कराना चाहते हैं, की आरएसएस कितने प्रकार के संगठन हैं, भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लगभग 50 से ज्यादा संगठन है। और यह संघ अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर भी ख्याति प्राप्त किया है। और 200 से ज्यादा संगठन क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं जिसमें कुछ प्रमुख संगठन है।

RSS का कार्य

दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन आरएसएस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कहा जाता है यह बहुत ही प्रसिद्ध संगठन है। आरएसएस के कार्य निम्नवत है। 

  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्य कार्य भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के आदेशों को बढ़ावा देना और हिंदू समाज को मजबूत बनाए रखना तथा हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करना।
  2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में व्यायाम खेल सूर्य नमस्कार और परेड जैसी आदि कार्य विधियां करवाई जाती है इन शाखाओं के भारतीय स्वयंसेवक संघ या हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से भी जाना जाता है।
  3. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शिक्षा वर्ग के माध्यम से समाज में राष्ट्रवादी एवं धर्म की शिक्षा दी जाती है।
  4. यह संघ सामाजिक सेवा और समाज में हो रहे अन्याय को सुधार के कार्य करता है यह संग हमेशा हिंदू धर्म में सामाजिक समानता को बढ़ावा देने पर कार्य करता है।
  5. यह संग समाज में शिक्षा और उज्जवल समाज संगठन के अनुशासन पर बल देता है।

RSS का इतिहास

जैसा की आप लोगों को मालूम होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 ईस्वी को विजयादशमी के तीन डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा किया गया था जिसकी स्थापना महाराष्ट्र के नागपुर शहर में हुआ था। आपको बता दें कि जब RSS क शुरुआत हुई थी तब इस जंग में केवल 5 लोग ही शामिल हुए थे। 

वक्त गुजरने के साथ साथ और लोग भी चुगने लगे और यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस संघ की 55 हजार से ज्यादा शाखाएं हैं जिसमें लाखों की संख्या में स्वयंसेवक शामिल है। 

जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस की शुरुआत हुई थी। तब लोगों ने डॉक्टर केशव बलीराम हेडगेवार का बहुत ज्यादा मजाक उड़ाया था, क्योंकि उस समय संघ में केवल 5 लोग ही शामिल हुए थे। और उन सदस्यों में बच्चे ही थे लेकिन आज ही संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संघ और हिंदू संगठन बन चुका है। इस संघ का एक ही उद्देश्य था कि ब्रिटिश राज्य के विरोध में हिंदुओं को एकजुट करना।

जब हेडगेवार जी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब वह कुछ क्रांतिकारियों से विचार-विमर्श लेकर महाराष्ट्र में आर एस एस की स्थापना कर दी।

संघ की स्थापना के मात्र 6-7 महीने बाद 17 अप्रैल 1926 को डॉ हेडगेवार जी ने अपने सहयोगियों के साथ एक मीटिंग की और उस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य संघ का नामकरण करना था। उस बैठक में सभी लोगों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं जिसमें से केवल तीन नामों को लेकर आगे विचार करने का फैसला लिया गया। वह तीन नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय द्वारक मंडल और जरिपटका मंडल।

काफी विचार विमर्श करने के बाद अंत में सब लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर मुहर लगा दी आज संघ द्वारा देश भर में अपनी पत्रिकाएं प्रसारित की जाती है जिन्हें लाखों लोग पढ़ते हैं इन सभी में मुख्य पत्रिका ऑर्गेनाइजर और एक हिंदी भाषा में पांच जने है। इसके अलावा और भी पत्रिका संपादित किए गए थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनों के नाम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक शब्द जो विचारधारा को आधार मानकर राष्ट्र एवं समाज की सेवा के लिए तत्पर हैं।

  • भारतीय जनता पार्टी
  • बजरंग दल
  • हिंदू जागरण मंच
  • भारतीय किसान संघ
  • विद्या भारती
  • सरस्वती शिशु मंदिर
  • अखिल भारतीय विश्व परिषद
  • वनवासी कल्याण आश्रम
  • मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
  • विश्व संवाद केंद्र
  • विवेकानंद केंद्र
  • भारतीय मजदूर संघ
  • विश्व हिंदू परिषद

RSS से जुड़ने से फायदे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तभी जुड़े जब आप देश के लिए कुछ कर सकें आपको बता दें की RSS से जुड़ने से आपको शारीरिक व मानसिक फायदे हो सकते हैं।

  • इससे आप जाति भेदभाव को भूल जाएंगे। 
  • आप यह सीख जाएंगे कि कठिन परिश्रम में लोगों की मदद कैसे किया जाता है। 
  • RSS में रोजाना व्यायाम करने से स्वास्थ्य ठीक रहेगा। 
  • RSS में जाने से आप में देश के प्रति राष्ट्रवादी और देश प्रेम की भावना जागृत हो जाती है
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आपको दैनिक अलग-अलग रूप से खेल में व्यायाम करवाते हैं जिससे आप मजबूत बने रहेंगे।

RSS ज्वाइन कैसे करें?

हमारे देश के बहुत से बच्चे एवं युवा ऐसे हैं, जो RSS को ज्वाइन करना चाहते हैं। आपको बता दूं कि RSS ज्वाइन करने के लिए किसी विशेष प्रकार की पात्रता की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन बहुत से लोगों को आरएसएस ज्वाइन करना बहुत कठिन लगता होगा।

आप को इस बात से अवगत करा दे कि इस संघ  में 18 से कम उम्र के बच्चों के विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना संस्कृत भाषा में लिखी गई है लेकिन आपको बता दें कि प्रार्थना की अंतिम पंक्ति हिंदी भाषा में लिखी गई है ।

आपको बता दूं कि RSS ज्वाइन करने की प्रक्रिया काफी सरल है। आरएसएस प्रचारक बनने के लिए आपको RSS के ऑफिशियल वेबसाइट https://www.rss.org पर विजिट करके आप ऑनलाइन सदस्यता फॉर्म को पूर्ण करना होगा।

यह फॉर्म आप बिना किसी शुल्क के भर सकते हैं। फॉर्म भरने के कुछ ही दिनों के बाद आपक मोबाइल नम्बर पर एक SMS आयेगा, कि आप RSS के सदस्य बन गए हैं। SMS प्राप्त होने के बाद आपको संघ द्वारा एक आईडी दिया जाएगा जो आप अपने आस-पास के RSS शाखा से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप यह प्रक्रिया शाखा के माध्यम से भी कर सकते हैं।

आरएसएस प्रचारक बनने के लिए आपको इस  https://www.rss.org/pages/joinrss.aspx लिंक पर क्लिक करना होगा। और पूछी गई जानकारी दें को भरे तथा फॉर्म को सबमिट कर दें।

RSS की सैलरी कितनी होती है?

RSS संस्था विश्व की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संस्था मानी जाती है। संग में बच्चे या युवा अपनी मर्जी से जुड़ते हैं। और इसके माध्यम से देश व देश के लोगों की सेवा करते हैं

बात करते हैं कि सैलरी कितनी दी जाती है? तो हम आपको बता दें कि संघ में जुड़ने वाले अपनी मर्जी से जुड़ते हैं, और किसी भी प्रकार की सैलरी नहीं लेते हैं। और आपको बता दें कि सेवा में किसी भी प्रकार की सैलरी नहीं ली जाती है।

RSS का मुख्य उद्देश्य।

आपको बता दें कि RSS का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति संगठन और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देना तथा बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को मजबूत करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करना। यही बातें RSS का मुख्य उद्देश्य मानी जाती है।

Conclusion-

दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आपको मेरा यह आर्टिकल "R S S ka full form क्या है? , और आर एस एस क्या है? जरूर पसंद आया होगा। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है और इससे संबंधित सभी जानकारी आप तक पहुंचाने की। तभी आप इस विषय के संदर्भ में किसी दूसरी वेबसाइट पर जाने की जरूरत ना पड़े। अगर आपको यह जानकारी पसंद आया हो तो कृपया इसे अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें

!धन्यवाद!

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